हिन्दू धर्म शास्त्र के अनुसार किसी भी देवता की पूजा अर्चना उनकी आरती के बिना करना अधूरा माना जाता है। जैसा की आप सभी जानते हैं कि परम बलशाली श्री हनुमान की पूजा आराधना भक्त जन भय से मुक्ति पाने के लिए करते हैं। ऐसी मान्यता है कि हनुमान जी का नाम सुनते ही सभी प्रकार के भय और दुःख स्वयं ही दूर हो जाते हैं।
भगवान शिव अवतार हनुमान जी की आरती और पूजा आराधना करने से मनुष्य को सभी प्रकार के भय से मुक्ति मिलती है और जीवन में आने वाली सभी प्रकार की नकारात्मक शक्तियों का खात्मा होता है। हनुमान जी को मानने वाले भक्त उनकी पूजा के दौरान हनुमान मंत्र और हनुमान चालीसा के साथ ही हनुमान आरती को भी ख़ासा महत्व देते हैं। माना जाता है कि प्रेम भक्ति भाव से हनुमान आरती करने वाले भक्तों के सभी दुःख बजरंग बली हर लेते हैं।
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Hindu Temple
Somnath temple is one of the most ancient architectural masterpieces in India that is located in the Saurashtra.
Priest & Gods
Rameshwaram can easily be reached from any part of India since the Rameshwaram railway station.
Vedas & Worship
Badrinath Temple : Hindu people because it is believed to be one of the 108 temples created for Lord Vishnu.


Temples
The Ancient Temples In India
Kedarnath Temple
Badrinath Temple
Somnath Temple
Golden Temple
हनुमान जी की आरती इस प्रकार है :
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
जाके बल से गिरिवर कांपे। रोग दोष जाके निकट न झांके।
अंजनि पुत्र महाबलदायी। संतान के प्रभु सदा सहाई।।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारी सिया सुधि लाए।
लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
लंका जारि असुर संहारे। सियारामजी के काज संवारे।
लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे।आनि संजीवन प्राण उबारे।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
पैठी पाताल तोरि जमकारे। अहिरावण की भुजा उखारे।
बाएं भुजा असुरदल मारे। दाहिने भुजा संत जन तारे।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
सुर-नर-मुनि जन आरती उतारें। जय जय जय हनुमान उचारें।
कंचन थार कपूर लौ छाई। आरती करत अंजना माई।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
लंकविध्वंस कीन्ह रघुराई। तुलसीदास प्रभु कीरति गाई।
जो हनुमानजी की आरती गावै। बसी बैकुंठ परमपद पावै।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।
आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।।
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