हर साल चैत्र माह शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को बजरंग बली हनुमान का जन्मोत्सव मनाया जाता है. मान्यता है कि इस दिन भगवान राम और हनुमान जी पूजा करने से जीवन से सभी कष्टों से छुटकारा मिलता है. हिंदू धर्म में हनुमान जी को 8 चिरंजीवियों में से एक माना जाता है. कहते हैं वह आज भी पृथ्वी पर मौजूद हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, हनुमान जयंती के दिन विधि-विधान से पूजा करने से व्यक्ति को हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है, जिससे उसके जीवन के सभी कष्ट और संकट दूर होते हैं. इस दिन पूजा में उन्हें फूल, माला, सिंदूर चढ़ाने के साथ बूंदी या बेसन के लड्डू, तुलसी दल अर्पित करने से वह प्रसन्न होते हैं.
इस दिन बजरंगबली हनुमान की पूजा करने से व्यक्ति के सभी कष्ट दूर होते हैं. साथ ही व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं भी पूरी होती है. इसके अलावा इस दिन जगह-जगह पर भव्य भंडारा का भी आयोजन किया जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, चैत्र माह की पूर्णिमा तिथि के दिन माता अंजनी और राजा केसरी के घर हनुमान जी का जन्म हुआ था.
Hindu Temple
Somnath temple is one of the most ancient architectural masterpieces in India that is located in the Saurashtra.
Priest & Gods
Rameshwaram can easily be reached from any part of India since the Rameshwaram railway station.
Vedas & Worship
Badrinath Temple : Hindu people because it is believed to be one of the 108 temples created for Lord Vishnu.


Temples
The Ancient Temples In India
Kedarnath Temple
Badrinath Temple
Somnath Temple
Golden Temple
हनुमान पूजा विधि :
हनुमान जयंती के मौके पर जो लोग व्रत रख रहे हैं उन्हें पूरे दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना होगा. इस दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर भगवान श्रीराम, माता सीता व हनुमानजी का स्मरण करें और व्रत का संकल्प लें. घर में पूजा के स्थान पर हनुमान जी की मूर्ति स्थापित करें और विधिपूर्वक पूजा करें. हनुमान जी को शुद्ध जल से स्नान करवाएं. फिर सिंदूर और चांदी का वर्क के साथ अबीर, गुलाल, चंदन और चावल चढ़ाएं, इसके बाद सुगंधित फूल और फूलों की माला चढ़ाएं, एवं नारियल चढ़ाएं. फिर केवड़ा या अन्य सुगंधित इत्र लगाएं. हनुमान जी मूर्ति के वक्ष स्थल यानी हृदय वाले स्थान पर चंदन से श्रीराम लिखें. इसी तरह श्रद्धापूर्वक जो भी चढ़ाना चाहते हैं वो हनुमान जी को चढ़ाएं. हनुमान जी की पूजा के बाद चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करें. नहीं कर पाएं तो श्रीराम नाम का ही जप कर लें. आखिरी में हनुमान जी को नैवेद्य लगाकर आरती करें और लोगों को प्रसाद बांटें.
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